उपनिषदहरू
वेदान्त दर्शनका मूल स्रोत - आत्मज्ञान र ब्रह्मज्ञानको दिव्य ज्ञान
उपनिषद के हुन्?
उपनिषदहरू वैदिक साहित्यका सबैभन्दा महत्वपूर्ण र गहन दार्शनिक ग्रन्थहरू हुन्। "उपनिषद" शब्दको अर्थ "नजिकै बसेर सुन्नु" हो, जुन गुरु-शिष्य परम्परामा गोप्य आध्यात्मिक ज्ञानको हस्तान्तरणलाई जनाउँछ।
उपनिषदहरूमा आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष, कर्म, र पुनर्जन्मका गहिरा दार्शनिक सत्यहरू प्रस्तुत छन्। यी ग्रन्थहरू हिन्दू दर्शनको आधार हुन् र वेदान्त दर्शनको मूल स्रोत मानिन्छन्।
मुख्य १० वटा उपनिषदहरूलाई "मुख्य उपनिषद" भनिन्छ, जसमा आदि शंकराचार्यले भाष्य लेखेका थिए। कुल २०८ वटा उपनिषदहरू रहेका छन्।
मुख्य उपनिषदहरू
ईश उपनिषद
शुक्ल यजुर्वेदको अन्तिम अध्याय। १८ मन्त्रमा ब्रह्मज्ञान र कर्म-ज्ञानको समन्वय।
थप पढ्नुहोस्माण्डूक्य उपनिषद
सबैभन्दा छोटो तर गहिरो उपनिषद। १२ मन्त्रमा ओंकार र चेतनाका चार अवस्था।
थप पढ्नुहोस्बृहदारण्यक उपनिषद
शुक्ल यजुर्वेद। सबैभन्दा प्राचीन र विस्तृत उपनिषद। याज्ञवल्क्यको शिक्षा।
थप पढ्नुहोस्दस मुख्य उपनिषदहरू
आदि शंकराचार्यले यी दस उपनिषदहरूमा भाष्य लेखेका थिए:
- ईश उपनिषद
- केन उपनिषद
- कठ उपनिषद
- प्रश्न उपनिषद
- मुण्डक उपनिषद
- माण्डूक्य उपनिषद
- तैत्तिरीय उपनिषद
- ऐतरेय उपनिषद
- छान्दोग्य उपनिषद
- बृहदारण्यक उपनिषद
चार महावाक्यहरू
उपनिषदहरूका चार प्रमुख महावाक्य जो वेदान्त दर्शनको सार हुन्:
- १. प्रज्ञानं ब्रह्म (चेतना नै ब्रह्म हो) - ऐतरेय उपनिषद
- २. अहं ब्रह्मास्मि (म नै ब्रह्म हुँ) - बृहदारण्यक उपनिषद
- ३. तत् त्वम् असि (त्यो तिमी नै हौ) - छान्दोग्य उपनिषद
- ४. अयम् आत्मा ब्रह्म (यो आत्मा नै ब्रह्म हो) - माण्डूक्य उपनिषद